सेवारत शिक्षकों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता किए जाने के आदेश ने शिक्षकों में आक्रोश पैदा कर दिया है। इसी के विरोध में बुधवार को अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षक जिला मुख्यालय स्थित गन्ना दफ्तर परिसर में धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। धरने में शामिल शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद ही टीईटी पास अभ्यर्थियों की नियुक्तियां शुरू हुईं, लेकिन 2010 से पहले तैनात हुए शिक्षकों पर अचानक यह बाध्यता थोपना पूर्णतः अन्याय और विसंगति है। उनका कहना था कि सेवक शिक्षक पहले से ही लंबे समय से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, ऐसे में नए नियमों को पुरानी नियुक्तियों पर लागू करना उचित नहीं है। धरनास्थल पर पहुंचे अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुशील पांडेय ने शिक्षकों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि हम सरकार के कर्मचारी हैं, इसलिए अपनी बात सीधे सरकार तक पहुंचाएंगे। सरकार को सुप्रीम कोर्ट में भी इस विषय पर ठोस जवाब दाखिल करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षक किसी भी स्थिति में अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे। अगर सरकार ने मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। धरना-प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने नारे लगाए और कहा कि यह फैसला उनके भविष्य से खिलवाड़ है। शिक्षक नेताओं ने साफ किया कि आने वाले दिनों में यह लड़ाई आरपार के लिए लड़ी जाएगी।