पुलिस लाइन का परेड ग्राउंड बुधवार को जवानों से खचाखच भरा हुआ। सामान्य दिनों में यहां रंगरूटों की टुकड़ियां मार्च या फायरिंग अभ्यास करती दिखती हैं, लेकिन बुधवार का दृश्य बिल्कुल अलग था। हाथों में हाईटेक उपकरण, सामने सेना की बम डिस्पोजल यूनिट और हर चेहरे पर उत्सुकता की चमक। यूपी पुलिस में भर्ती हुए इन युवा रंगरूटों को पहली बार समझाया जा रहा था कि अगर कहीं बम मिलने की सूचना हो जाए तो उससे कैसे निपटना है। जी हां यहां भारतीय सेना पुलिस के नए रंगरूटों को बम डिस्पोज करना सीख रही थी भारतीय सेना की बम डिस्पोजल कंपनी के विशेषज्ञों ने सबसे पहले रंगरूटों को आधुनिक उपकरणों का परिचय कराया। किसी ने पहली बार बम सूट देखा, तो किसी की नजरें डिफ्यूज किट पर टिक गईं। धीरे-धीरे उन्हें समझाया गया कि बम मिलने पर घबराना नहीं, बल्कि पूरे इलाके को खाली कराकर सुरक्षित दूरी से कार्रवाई करनी होती है। सेना के जवानों ने डेमो दिखाते हुए यह भी बताया कि किस तरह रोबोटिक डिवाइस और रिमोट तकनीक का इस्तेमाल कर विस्फोटक को निष्क्रिय किया जाता है। कई रंगरूटों ने सवाल पूछे कि अगर बम टाइम डिवाइस पर हो तो? अगर आईईडी इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस हो तो क्या करना चाहिए। सेना के प्रशिक्षकों ने धैर्य से हर सवाल का जवाब दिया। इस कार्यशाला में करीब 300 अभ्यर्थी शामिल हुए, जो वर्तमान में नौ महीने का आधारभूत प्रशिक्षण ले रहे हैं। आमतौर पर उन्हें परेड, हथियार चलाने, अपराध स्थल की जांच, केस डायरी जैसी मूलभूत बातें सिखाई जाती हैं। लेकिन इस बार प्रशिक्षण का स्तर कुछ और ऊंचा था।