बाराबंकी में शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर मौसली क्षेत्र के खैरातीपुर गांव की महिलाएं नवरात्रि पर आस्था और आत्मनिर्भरता दोनों की मिसाल पेश कर रही हैं। गांव की गलियों में मिट्टी, रंग और कपड़ों की खुशबू घुली है, जहां महिलाएं माता की मूर्तियां और शृंगार सामग्री बनाने में जुटी हैं। यही हुनर उनका रोजगार भी है और पूरे साल का सहारा भी। खैरातीपुर की जगदेई बताती हैं कि वह पिछले 25 से 30 सालों से मूर्तियां बनाने का काम कर रही हैं। आज उनके साथ पूरा परिवार इस परंपरा से जुड़ा है। उनकी मेहनत से तैयार मूर्तियों की मांग सिर्फ बाराबंकी ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों हरदोई, बहराइच और सीतापुर तक है। गांव की करीब 8 से 10 महिलाएं मिलकर अलग-अलग स्वरूपों में माता की मूर्तियां तैयार करती हैं। विशेष बात यह है कि केवल मूर्तियां ही नहीं, बल्कि उनका शृंगार और सजावट का काम भी महिलाएं खुद करती हैं। त्योहार के दिनों में वे देर रात तक मेहनत कर मूर्तियां तैयार करती हैं।