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बाराबंकी में बंदरों के संरक्षण को रेठ नदी किनारे बनेगी बजरंग वाटिका, एक हेक्टेयर जमीन चिन्हित

बाराबंकी में नगर पालिका परिषद नवाबगंज के बबुरिहा गांव में रेठ नदी किनारे एक हेक्टेयर बजरंग वाटिका बनाई जाएगी। डीएम ईशान प्रताप सिंह ने बंदरों के संरक्षण और उनसे नागरिकों की सुरक्षा के लिए यह पहल की है। इस वाटिका में शहर के वानरों को पकड़कर छोड़ा जाएगा, जैसे गो आश्रय स्थलों में छुट्टा जानवर पहुंचाए जाते हैं। बजरंग वाटिका के लिए चयनित स्थल रेठ नदी किनारे रमणीय है और पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। एक हेक्टेयर भूखंड के उत्तर व पश्चिम कोने में हनुमान जी के दो मंदिर हैं। एक पंचमुखी हनुमान और दूसरा एक मुखी हनुमान की मूर्ति वाला मंदिर है। पूरब में रेठ नदी का किनारा तथा उत्तर व पश्चिम में रेलवे लाइन का किनारा है। नगर पालिका एक हेक्टेयर में बजरंग वाटिका विकसित करेगा और वन विभाग इसमें मदद करेगा। वन विभाग आम, अमरूद, जामुन, गूलर, पाकड़ व पीपल जैसे फल एवं छायादार पौधे रोपेगा। ये पौधे चार-पांच साल में फल व छाया देने लायक हो जाएंगे। पौधों को बड़े लोहे के घेरों में रोपा जाएगा, जिनमें ऊपर भी जाली रहेगी। ईओ संजय कुमार शुक्ला और वन क्षेत्राधिकारी सदर धर्मेंद्र कुमार ने बृहस्पतिवार को स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने बजरंग वाटिका बनाने की कवायद तेज करने की बात कही। ईओ संजय कुमार शुक्ला ने कहा कि यह विकल्प बंदरों के संरक्षण में कारगर सिद्ध होगा। इससे नागरिकों को बंदरों से होने वाले नुकसान से भी बचाया जा सकेगा। यह पहल मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में सहायक होगी। नदी किनारे का प्राकृतिक वातावरण बंदरों के लिए उपयुक्त होगा। प्रस्तावित बजरंग वाटिका स्थल पर बने हनुमान मंदिरों की रोचक कथा है। पुजारी रामचंद्र ने बताया कि सहजराम यादव के पुत्र ने पुलिस भर्ती में सफलता पर पंचमुखी हनुमान मंदिर बनवाया। एकल मुखी हनुमान मंदिर एक तेजस्वी वानर के निधन के बाद उसकी समाधि स्थल पर बना। पुजारी ने इसे बजरंगबली की कृपा बताया कि यहां बंदरों के संरक्षण के लिए वाटिका बन रही है।

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