यूपी का बाराबंकी में शुक्रवार को आपदा को प्रबंधन को लेकर विधान परिषद दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति ने कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला सफेदाबाद के निकट स्थित मेयो मेडिकल कॉलेज के सभागार में हुई। दरअसल, डूबने और सर्पदंश से हुई मौतौं के मामले में प्रदेश के शीर्ष पांच जिलों में शामिल है। कार्यशाला में समिति के सभापति एमएलसी अवनीश सिंह पटेल, सदस्य एमएलसी अंगद सिंह और उमेश द्विवेदी मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। साथ ही अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अ. सूदन, विभिन्न ब्लॉकों के ग्राम प्रधान, लेखपाल और सेक्रेटरी चर्चा में शामिल रहे। आपदा विशेषज्ञों ने बताया कि हम पढ़ाई-लिखाई पर तो ध्यान देते हैं, मगर बच्चों को तैराकी नहीं सिखाते। ग्रामीण क्षेत्रों में तैराकी को अनिवार्य की जाए। स्कूलों में इसे खेलकूद की तरह जोड़ा जाए। यह कदम बाढ़ और अन्य जल संबंधी आपदा से होने वाली मौतों को रोक सकता है। एमएलसी अवनीश सिंह पटेल ने कहा कि बाराबंकी में हर साल बाढ़, डूबने और सर्पदंश की घटनाओं में कई लोगों की जान चली जाती है। हमें आपदा प्रबंधन को केवल सरकारी जिम्मेदारी न समझकर इसे जनभागीदारी से लागू करना होगा। पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए। ताकि, ग्रामीण खुद को आपदा के लिए तैयार रख सकें।