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VIDEO: आस्था, इतिहास और चमत्कार की जीवंत मिसाल है दुखहरण नाथ मंदिर

संवाद न्यूज एजेंसी, उतरौला (बलरामपुर)। नगर के आर्यनगर मोहल्ले में स्थित दुखहरण नाथ मंदिर सदियों पुरानी आस्था, इतिहास और लोककथाओं का अद्भुत संगम माना जाता है। यहां स्थापित शिवलिंग अपनी विशेष बनावट और उससे जुड़ी चमत्कारी कथा के कारण दूर-दराज के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मंदिर में मौजूद शिवलिंग उत्तर दिशा की ओर हल्का झुका हुआ है, जो इसे अन्य शिवालयों से अलग पहचान देता है। शिवलिंग के शीर्ष पर आज भी आरे से काटे जाने जैसे निशान स्पष्ट दिखाई देते हैं, जिन्हें स्थानीय लोग मंदिर की प्राचीन कथा से जोड़कर देखते हैं। मंदिर के संरक्षक महंथ पुरुषोत्तम गिरि के अनुसार यह स्थान पहले एक ऊंचा टीला हुआ करता था। वर्षों पूर्व घुमक्कड़ संत जयकरन गिरि यहां विश्राम के लिए रुके थे। रात्रि में उन्हें स्वप्न में इसी टीले की खुदाई करने का संकेत मिला। सुबह ग्रामीणों की सहायता से जब खुदाई कराई गई तो मिट्टी के भीतर दबा शिवलिंग प्राप्त हुआ। इसके बाद उसी स्थान पर विधि-विधान से स्थापना हुई। मुगल शासक ने शिवलिंग पर चलवाया आरा तो बही खून की धारा.. लोककथा के अनुसार उस समय के मुगल शासक नेवाज खां ने स्थापना में बाधा डालते हुए शिवलिंग को काटने का आदेश दिया। कहा जाता है कि जैसे ही आरा चलाया गया, शिवलिंग से रक्त जैसी धारा बहती दिखाई दी, जिसे देख उपस्थित लोग भयभीत हो गए और कार्य रोक दिया गया। इस घटना के बाद शासक को अपनी भूल का एहसास हुआ और शिवलिंग की स्थापना यथास्थान होने दी गई। यही कथा आज भी श्रद्धालुओं के बीच मंदिर की महिमा के रूप में सुनाई जाती है। मुख्य शिवलिंग के साथ ही हर दिशा में 12 और शिवलिंग है स्थापित मंदिर परिसर की एक और विशेषता यह है कि मुख्य शिवलिंग के अतिरिक्त उत्तर, दक्षिण और पूर्व दिशा में कुल 12 अन्य शिवलिंग भी स्थापित हैं, जो इस स्थान को आध्यात्मिक रूप से और समृद्ध बनाते हैं। प्रत्येक सोमवार को यहां भक्तों की लंबी कतार लगती है, जबकि महाशिवरात्रि, हरतालिका तीज, सावन मास और मलमास में जलाभिषेक के लिए भारी भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में जलाभिषेक और दर्शन की समुचित व्यवस्था की गई है। पूजा सामग्री जैसे फूल, बेलपत्र, धतूरा और प्रसाद आदि मंदिर के बाहर स्थित दुकानों पर सहज उपलब्ध रहते हैं। व्यवस्थापक अमर चंद्र गुप्त के अनुसार मंदिर की ऐतिहासिकता और चमत्कारिक कथा के कारण यहां आने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इतिहास, लोकविश्वास और धार्मिक परंपरा का यह अनूठा संगम दुखहरण नाथ मंदिर को केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और आस्था के जीवंत केंद्र के रूप में स्थापित करता है।

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