तहसीलदार न्यायालय व नायब तहसीलदार न्यायालय के मुख्य द्वार पर ताला लटका देख अधिवक्ता व वादकारियों ने सोमवार को जमकर हो-हल्ला मचाया। हांलाकि कुछ ही देर बाद तहसीलदार न्यायालय खुल गया, लेकिन अधिवक्ताओं के हो-हल्ला के बावजूद नायब तहसीलदार न्यायालय के दरवाजे पर ताला लटका रहा। सोमवार सुबह से ही नायब तहसीलदार न्यायालय के दरवाजे पर ताला लटका हुआ था। तहसीलदार न्यायालय खुल गया था, अचानक 12 बजे के लगभग तहसीलदार न्यायालय के दरवाजे पर ताला लटका देख अधिवक्ताओं ने नाराजगी व्यक्त करते हुए हो-हल्ला मचाया। कुछ देर में ही दरवाजा खुला गया। वहीं, नायब तहसीलदार न्यायालय के दरवाजे पर खड़े होकर अधिवक्ताओं ने हो-हल्ला मचाया, बावजूद दरवाजा नहीं खुला। इससे नाराज अधिवक्ता ओमप्रकाश सिंह, देवेन्द्र मिश्र, शत्रुघ्न सिंह, आदित्य सिंह, योगेंद्र पाण्डेय आदि अधिवक्ताओं व वादकारियों का कहना है कि नायब तहसीलदार न्यायालय नियमित कभी खुलता ही नहीं है। सप्ताह में एक से दो दिन खुलता है। इससे वादकारियों को त्वरित न्याय नहीं मिलता है।अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायालयों में फाइल दर्ज नहीं होती है। कई मूल फाइलें आज भी गायब हैं, तो दूसरी तरफ विपक्षी मूल आदेशित फाइलों के गायब होने का नाजायज फायदा उठाकर दूसरा वाद दाखिल कर नाजायज फायदा लेने की कोशिश में लगे रहते हैं। अधिवक्ताओं ने नियमित न्यायालयों को खोलने व गायब फाइलों को अविलंब ढूंढने की मांग की है। वहीं उपजिलाधिकारी बैरिया सुनील कुमार ने बताया कि तहसीलदार सुदर्शन कुमार व नायब तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी सम्पूर्ण समाधान दिवस में व्यस्त थे। फिलहाल न्यायालय खुल चुका है।