क्या आप जानते हैं… बहराइच शहर का एक ऐसा ऐतिहासिक स्थल, जो कभी शहर का दिल कहलाता था… आज गंदगी और उपेक्षा की सांसें गिन रहा है… हम बात कर रहे हैं — स्टीलगंज तालाब की।” “बहराइच का स्टीलगंज तालाब… करीब 100 साल पुराना इतिहास अपने भीतर समेटे हुए है। इस तालाब का निर्माण तत्कालीन अंग्रेज़ कलेक्टर स्टील ने करवाया था। घंटाघर चौक के पास, लगभग 500 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला यह तालाब कभी शहर के बीचोंबीच शांति का प्रतीक हुआ करता था।” “अपने शुरुआती दौर में स्टीलगंज तालाब बहराइच के अभिजात वर्ग का पसंदीदा ठिकाना था। शाम होते ही लोग इसकी सीढ़ियों पर बैठकर ठंडे और शीतल जल के पास सुकून के पल बिताते थे। उस दौर में यह तालाब सचमुच शहर का दिल था।” “आजादी के बाद, करीब 1975 में नगरपालिका ने तालाब का सुंदरीकरण कराया। इसके चारों ओर लगभग 328 दुकानें बनाई गईं। धीरे-धीरे यह इलाका बहराइच का एक बड़ा और व्यस्त बाज़ार बन गया, जहाँ हर ज़रूरत का सामान मिलने लगा, खासकर महिलाओं के लिए।” “इसी तालाब के पास स्थित है कांग्रेस भवन, जो इस पूरे क्षेत्र को एक ऐतिहासिक पहचान देता है।” “लेकिन समय के साथ स्टीलगंज तालाब की हालत बदलती चली गई। दुकानों से निकलने वाला कचरा सीधे तालाब में गिरने लगा। नतीजा ये हुआ कि तालाब धीरे-धीरे पटता गया, जल स्रोत सूखने लगा, और आज यह जगह दुर्गंध और गंदगी का केंद्र बन चुकी है।” “कभी जो रेलिंग और सौंदर्यीकरण इसकी पहचान थे, वो अब गायब हो चुके हैं। स्थानीय लोग बदबू और बीमारी के डर में जीने को मजबूर हैं।” “कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह इलाका राजा सुहेलदेव और सालार मसूद गाजी के युद्ध से भी जुड़ा रहा है। भले ही यह विषय विवादित हो, लेकिन तालाब का ऐतिहासिक महत्व इससे और भी बढ़ जाता है।” “आज ज़रूरत है स्टीलगंज तालाब को फिर से उसकी पहचान लौटाने की। यह सिर्फ एक तालाब नहीं, बहराइच के इतिहास की धरोहर है। अगर समय रहते इसे नहीं बचाया गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ इसे सिर्फ किताबों में ही पढ़ेंगी।” “स्टीलगंज तालाब इतिहास की पुकार है… क्या हम सुनेंगे?”