भारत-नेपाल की खुली सीमा और पीढ़ियों से चली आ रही ‘रोटी-बेटी’ की परंपरा पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान ने ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्होंने नेपाल सीमा से सटे आदिवासी इलाकों को झकझोर कर रख दिया है। तहसील क्षेत्र के थारू बहुल गांवों में एसआईआर नोटिस मिलने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश दफ्तरों के सामने फूट पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आज के नियम रामायण काल में होते, तो सीता माता को भी प्रमाण न होने पर नेपाल लौटना पड़ता। धर्मापुर और सेमरी मलमला गांवों के सैकड़ों ग्रामीण शुक्रवार को मिहीपुरवा विकास खंड कार्यालय पहुंचे। सहायक निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर दिनभर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। अशिक्षित और सीमांत ग्रामीण बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटते नजर आए। ग्रामीणों का आरोप है कि न तो एसआईआर को लेकर स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही यह बताया गया कि किन परिस्थितियों में कौन-से दस्तावेज मान्य होंगे। ग्रामीणों के अनुसार, नोटिस में महिलाओं से विवाह से पूर्व वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम, नागरिकता से जुड़े प्रमाण और अन्य दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि इन गांवों में बड़ी संख्या में शादियां नेपाल में हुई हैं, जहां ऐसे भारतीय अभिलेखों का होना स्वाभाविक नहीं है। धर्मापुर निवासी महेश कुमार ने बताया कि बीएलओ ने साफ कहा है “दिल्ली से नागरिकता प्रमाण पत्र लाओ, तभी नाम जुड़ेगा।” वहीं अमरपाल ने बताया कि उनकी शादी करीब 40 वर्ष पूर्व नेपाल में हुई थी। उन्होंने कहा, “भारत और नेपाल का रिश्ता हमेशा रोटी-बेटी का रहा है, लेकिन अब उसी रिश्ते को संदेह के घेरे में डाल दिया गया है।” ‘राम-सीता’ का उदाहरण देकर जताया आक्रोश अमरपाल ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “भगवान राम का विवाह जनकपुर (नेपाल) में हुआ था। तब कोई प्रमाण नहीं मांगा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कुछ दिन पहले नेपाल बारात लेकर गए थे। आज भी मंदिरों में राम के साथ सीता माता विराजमान हैं। यदि यही नियम होते, तो सीता माता को भी प्रमाण देना पड़ता, नहीं तो नेपाल लौटना पड़ता।” जनप्रतिनिधि रही महिला को भी थमाया गया नोटिस धर्मापुर गांव में नेपाल से ब्याही गई पम्मी देवी का मामला भी कई सवाल खड़े करता है। उनकी शादी वर्ष 2013 में हुई थी। वे पिछले पंचायत चुनाव में वार्ड नंबर 45 से क्षेत्र पंचायत सदस्य चुनी गईं और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में मतदान भी कर चुकी हैं। इसके बावजूद उन्हें एसआईआर का नोटिस थमा दिया गया। पम्मी देवी ने बताया कि वे नेपाल से पिता की नागरिकता और नेपाली मतदाता पहचान पत्र लेकर आई थीं, लेकिन इन्हें अमान्य बताया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया, “अब और कौन-सा प्रमाण दें?” नागरिकता आवेदन की पावती जरूरी उपजिलाधिकारी मिहीपुरवा राम दयाल ने बताया कि नेपाल की जिन महिलाओं की शादी भारत में हुई है, यदि वे भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से संबंधित प्रमाण या नागरिकता आवेदन की पावती प्रस्तुत करती हैं, तो उसे एसआईआर नोटिस का उत्तर मानते हुए उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। अन्य मामलों में उच्चाधिकारियों के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।