नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने नेपाल–भारत सीमा नाकों से आने वाले आम नागरिकों द्वारा लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य के दैनिक उपयोग के सामान पर लगाए गए भंसार शुल्क की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने तत्काल प्रभाव से इस शुल्क को न वसूलने का आदेश जारी किया है। बताया गया कि शुक्रवार को न्यायाधीश हरिप्रसाद फुयाल और टेकप्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय, अर्थ मंत्रालय सहित संबंधित निकायों को दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर भंसार शुल्क न लेने का अंतरिम आदेश दिया। नेपाल सरकार के अर्थ मंत्रालय द्वारा लागू की गई इस सख्ती के खिलाफ अधिवक्ता अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोग्य सिंह और प्रशांत विक्रम शाह ने अप्रैल 2026 में सर्वोच्च अदालत में रिट याचिका दायर की थी। अधिवक्ता आकाश महतो के अनुसार, यह आदेश भंसार महसूल ऐन 2081 की धारा 13(2) के तहत जारी किया गया है। नेपाल सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का भारत-नेपाल सीमावर्ती बहराइच के रुपईडीहा में व्यापारियों और नगरवासियों ने स्वागत किया है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के संरक्षक एवं सभासद रतन अग्रवाल, सभासद एवं समाजसेवी व्यापारी राजा इमाम रिजवी तथा उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष शैलेश जायसवाल सहित नगरवासियों और व्यापारियों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह निर्णय भारत और नेपाल के बीच वर्षों पुराने रोटी-बेटी के संबंधों को और मजबूत करने वाला है। उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों के लोग अपने रिश्तेदारों के लिए उपहार एवं दैनिक उपयोग का सामान आसानी से ले जा सकेंगे। इससे सीमा क्षेत्र में आपसी संबंध, भाईचारा और सामाजिक सौहार्द को और मजबूती मिलेगी, दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्र में व्यापारिक समृद्धि आएगी।