बहराइच में नेपाल से निकलकर कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के बीच से बहने वाली गेरुआ नदी व उसके आसपास एक नई उम्मीद जगी है। इस क्षेत्र के उर्रा गांव के पास शनिवार को 100 से अधिक मगरमच्छ के बच्चे देखे गए हैं। इनमें से करीब साठ को रेस्क्यू कर लिया गया है। जबकि, चालीस से अधिक बच्चे कहीं रेंग कर चले गए। अब इन गायब बच्चों को खोजने का प्रयास किया जा रहा है। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी सिर्फ दुर्लभ वन्यजीव ही नहीं दुर्लभ जलीय जीवों के लिए भी पर्यटन के मानचित्र में अपना प्रमुख स्थान रखता है। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के बीच से होकर बहने वाली गेरुआ नदी में गंगेटिक डॉल्फिन, मगरमच्छ, घड़ियाल व दुर्लभ प्रजाति की अन्य मछलियां और कछुए पाए जाते हैं। जलीय जीवों का आश्रय स्थल होने के साथ ही गेरुआ नदी में वैसे तो घड़ियालों का कुनबा बढ़ा है, लेकिन मगरमच्छ की संख्या भी बढ़ रही है। शनिवार को ककरहा वन रेंज के ग्राम उर्रा बाजार में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास स्थित खाली पडी जमीन में शनिवार की सुबह खेत जा रहे ग्रामीणों ने सैकड़ों की संख्या में मगरमच्छ के बच्चे देखे। उनमें से अधिकांश की लंबाई पांच इंच से अधिक थी। इन बच्चों को देखने के लिए ग्रामीण एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने इसकी सूचना ककरहा वन रेंज को दी। सूचना के बाद पहुंचे फारेस्ट गार्ड राम कुमार यादव ने मौके से करीब साठ मगरमच्छ को रेस्क्यू कर लिया। वन क्षेत्राधिकारी ककरहा धर्मेन्द्र कुमार कनौजिया ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद रेस्क्यू किए गए मगरमच्छ के बच्चों को पानी में छोड़ा जाएगा। उनका कहना है कि यह एक बेहतर संकेत है। जब इस क्षेत्र में घड़ियाल के साथ ही मगरमच्छ की संख्या बढ़ रही है।