कम छात्र संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों को बंद किए जाने के सरकार के निर्णय के विरोध में शुक्रवार को भारी तादाद में शिक्षक बीएसए कार्यालय पहुंचे। धरना देकर अपना विरोध जताया और सीएम को संबोधित ज्ञापन बीएसए को सौंपा। सरकार से यह फैसला वापस लेने की मांग किया। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कि सरकार द्वारा बच्चों को शिक्षा देने के लिए गांवों में स्कूल खोला गया। अब 50 से कम संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों को तोडकर दूसरे विद्यालय में सम्मिलित करना गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित करना है। विद्यालय बंद करने से शिक्षकों का पद भी खत्म करने की शासन को मंशा है, जिसको शिक्षक संघ बर्दाश्त नहीं करेगा। जिलामंत्री मंत्री जितेंद्र कुमार राय ने कहा कि एक तरफ सरकार ने जहां शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है, अधिनियम 2009 बनाकर सबके लिए शिक्षा की बात कहीं वहीं, अब विद्यालयों को बंद कर शिक्षा से वंचित करना चाह रही है। उमाशंकर सिंह ने कहा कि बीते पांच वर्षों से शिक्षकों को नियुक्ति नहीं हुई, हजारों युवक शिक्षक बनने की पालता लेकर घूम रहे हैं। कुछ तो अपने प्रदेश में शिक्षक न बन पाने के कारण बिहार राज्य में नौकरी करने को मजबूर हैं। सरकार की दोहरी नीति नहीं चलने दी जाएगी। मंजूलता राय ने कहा कि 10 वर्षों में सरकार शिक्षकों की पदोन्नति नहीं की जबकि नियमावली में प्रतिवर्ष पदोन्नति का नियम है।