यूजीसी के संशोधित नियमों को लेकर सवर्ण समाज का विरोध शुरू हो गया है। सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने प्रेस वार्ता कर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि नए यूजीसी नियमों के तहत शिक्षण संस्थानों में सवर्ण छात्र-छात्राओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है। प्रेस वार्ता में मौजूद लोगों ने कहा कि यदि किसी सवर्ण छात्र के खिलाफ शिकायत दर्ज होती है, तो उसकी जांच के लिए बनाई गई समिति में किसी भी सवर्ण वर्ग के सदस्य को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में जांच निष्पक्ष कैसे होगी, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवर्ण समाज का आरोप है कि अगर किसी छात्र के खिलाफ की गई शिकायत झूठी भी साबित हो जाती है, तो शिकायतकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, जबकि छात्र का भविष्य और करियर बर्बाद हो सकता है। इस दौरान ब्राह्मण समाज के नेता राम अनुज तिवारी ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि यूजीसी के इस नियम को तत्काल वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए। साथ ही जांच समितियों में सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। सवर्ण समाज ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।