रामनगरी में श्रीराम विवाहोत्सव में मानो त्रेता युग पुनः जीवंत हो गया। जानकी महल में प्रस्तुत फुलवारी लीला वातावरण को देवत्व से भर गई। दिल्ली से आई 40 कलाकारों की टीम ने अपने अभिनय, नृत्य और संगीत से रामायण काल को ऐसा उतारा कि दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए। उनके अभिनय में वह सहजता, भाव और पवित्रता थी जिसने रामलीला को महज मंचन नहीं, बल्कि दर्शन का रूप दे दिया। पुष्पों की झरती पंखुड़ियों के बीच बालिका स्वरूपा सीता का बगीचे में पुष्प तोड़ना, सखियों का मधुर गीत और फूलों की वर्षा के बीच रचित भावनात्मक दृश्य दर्शकों को ऐसा प्रतीत करा रहे थे कि माता जानकी अभी इसी महल से मुस्कराते हुए निकलेंगी। जानकी महल की सजावट, दीपों का सौम्य प्रकाश और पुष्पों की महक ने इस लीला को आध्यात्मिक सौंदर्य का अद्भुत रूप दे दिया। शाम को उत्सव की कड़ी में डांडिया नृत्य आयोजित किया गया। इस दौरान महिला श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव में नृत्य किया। राजा दशरथ की भूमिका में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के शिष्य महंत कमल नयन दास ने राम समेत चारों भाइयों को आशीर्वाद मार्ग दिया। जानकी महल में स्थापित मनोहारी फुलवारी को जनकपुर की उस फुलवारी के रूप में प्रस्तुत में किया, जहां त्रेता में श्रीराम और सीता का पहली बार आमना-सामना हुआ था। जानकी महल के ट्रस्टी आदित्य सुल्तानिया ने बताया कि 25 नवंबर को भव्य राम बरात निकाली जाएगी जिसमें एक हजार बराती शामिल होंगे। उससे पहले विवाह की रस्में पूरी की जा रही हैं।