श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं की संख्या में कमी दर्ज की जा रही है। जून महीने तक प्रतिदिन करीब एक लाख श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या घटकर लगभग 60 हजार प्रतिदिन रह गई है। दर्शनार्थियों की संख्या कम होने का असर मंदिर के आसपास के व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। रामपथ और मंदिर क्षेत्र के आसपास प्रसाद, पूजा सामग्री, होटल, रेस्टोरेंट और अन्य कारोबार से जुड़े कई व्यापारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या घटने से बिक्री प्रभावित हुई है। कुछ कारोबारियों का मानना है कि हाल में सामने आए चढ़ावा गड़बड़ी के मामले का असर श्रद्धालुओं की भावना पर पड़ा है, जिससे दर्शनार्थियों की संख्या में कमी आई है। हालांकि, सभी कारोबारी इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि जुलाई में हर वर्ष स्कूल-कॉलेज खुलने, मानसून और छुट्टियां समाप्त होने के कारण स्वाभाविक रूप से श्रद्धालुओं की संख्या कम हो जाती है। उनके मुताबिक इसे केवल चढ़ावा प्रकरण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सूत्रों के अनुसार मंदिर में मिलने वाले नकद चढ़ावे में भी कमी देखने को मिल रही है। बताया जा रहा है कि पहले गणना के दौरान 100 और 500 रुपये के नोटों की गड्डियां अधिक बनती थीं, जबकि अब 10, 20 और 50 रुपये के नोटों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। सूत्र इसे हाल के घटनाक्रम के बाद श्रद्धालुओं के दान देने के तरीके में आए बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, मंदिर ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं की संख्या में कमी या चढ़ावे में गिरावट को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में चढ़ावे में कमी और उसके कारणों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।