राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है। अब तक पुलिस आठ आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है और उनके कब्जे से करीब 81 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। मामले के सामने आने के बाद जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखने वाले संवाददाता नितिन मिश्र ने बताया कि चढ़ावा चोरी का मामला सात जून को ही सामने आ गया था। हालांकि उसी समय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि कोई उल्लेखनीय अनियमितता सामने नहीं आई है। इसके बाद 13 जून को अयोध्या पहुंचे श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने अपने बयान में चोरी की घटना की पुष्टि की। उनके बयान के बाद ट्रस्ट ने शासन को पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने का अनुरोध किया। शासन द्वारा एसआईटी का गठन किए जाने के बाद जांच शुरू हुई और प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पुलिस ने उनके पास से लगभग 81 लाख रुपये भी बरामद किए। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में एसआईटी ने तत्कालीन महासचिव चंपत राय को क्लीन चिट दी। इसी दौरान चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। छह जुलाई को आयोजित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। बैठक में डॉ. कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। घटना के बाद ट्रस्ट ने मंदिर की व्यवस्थाओं में भी कई बदलाव किए हैं। चढ़ावे की गणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है तथा सुरक्षा और बैंकिंग संबंधी नियमों को भी पहले से अधिक सख्त किया गया है। इस प्रकरण को लेकर रामभक्तों के साथ-साथ संत-धर्माचार्यों में भी नाराजगी और पीड़ा देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि आस्था के केंद्र से जुड़ी ऐसी घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सभी की निगाहें 22 जुलाई को प्रस्तावित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट के नए महासचिव के चयन समेत कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिए जा सकते हैं।