जब फैजाबाद अवध की राजधानी हुआ करता था, तब नवाबी शान और खुशबू से भरा एक विशिष्ट परिसर बसाया गया, जिसे आज गुलाबबाड़ी के नाम से जाना जाता है। यह ऐतिहासिक गुलाबबाड़ी 18वीं शताब्दी में लगभग 1775 ईस्वी में अवध के तीसरे नवाब शुजा-उद-दौला द्वारा बनवायी गई थी। खास बात यह है कि नवाब ने इसे अपने जीवनकाल में ही अपने मकबरे के रूप में तैयार कराया था। उनकी मृत्यु के बाद उन्हें तथा बाद में उनकी माता को भी यहीं दफन किया गया। गुलाबबाड़ी का नाम यहां कभी लगाई गई गुलाब की दुर्लभ प्रजातियों के कारण पड़ा। चारबाग शैली पर आधारित इस परिसर में जल नहरें, फव्वारे और बीच में स्थित भव्य मकबरा नवाबी स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। कम लोग जानते हैं कि यहां मस्जिद, इमामबाड़ा और शाही हमाम भी हुआ करते थे। वर्तमान में यह राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक है और एएसआई के संरक्षण में है, लेकिन रखरखाव के अभाव में इसकी दीवारें जर्जर हो चुकी हैं, पेंटिंग नहीं हुई है और फव्वारे भी बंद पड़े हैं। गुलाब की विविध प्रजातियां भी अब नहीं लगाई जा रहीं। यदि समुचित संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया जाए, तो पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो सकती है।