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Video: अयोध्या में डॉक्टर बनकर गांव में रह रहा था डेढ़ लाख का इनामी बदमाश

पूर्वांचल के कुख्यात अपराधी भानु प्रताप सिंह उर्फ बबलू की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। डेढ़ लाख से अधिक का इनामी रहा भानु प्रताप पिछले करीब 10 महीनों से अयोध्या के थाना तारुन क्षेत्र के घूरी टीकर गांव में अपनी पहचान छिपाकर डॉक्टर बनकर रह रहा था। गांव के लोग उसे एक साधारण और मिलनसार डॉक्टर साहब के रूप में जानते थे, जबकि उसकी असली पहचान अपराधी की थी। जानकारी के अनुसार, भानु प्रताप अपनी पत्नी कुसुम सिंह और छह माह के बेटे के साथ गांव में किराए के मकान में रह रहा था। उसकी पत्नी जीएनएम का कोर्स कर चुकी है और गांव में एक छोटा क्लिनिक संचालित करती थी। बताया जा रहा है कि भानु भी क्लिनिक के संचालन में सक्रिय सहयोग करता था। वह मरीजों को दवाएं देने, पर्ची बनाने और लोगों से सामान्य व्यवहार करने के कारण गांव वालों का भरोसा जीत चुका था। यही वजह रही कि करीब 10 महीनों तक किसी को उसके आपराधिक अतीत की भनक तक नहीं लगी। पत्नी कुसुम सिंह ने बताया कि दोनों की मुलाकात करीब दो वर्ष पहले हुई थी। बाद में उन्होंने शादी कर ली और अयोध्या आकर रहने लगे। उसके मुताबिक घटना वाली रात वह घर के अंदर सो रही थी जबकि भानु बाहर सो रहा था। सुबह उठने पर पति और उसकी मोटरसाइकिल दोनों गायब मिले। कुछ देर बाद सूचना मिली कि ऐमी घाट के पास पुलिस मुठभेड़ में उसके पति की मौत हो गई है। भानु प्रताप सिंह मूल रूप से गोरखपुर का निवासी था। उसके खिलाफ गोरखपुर, आजमगढ़, बस्ती और अंबेडकरनगर समेत कई जिलों में हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी और फिरौती जैसे करीब 40 संगीन मुकदमे दर्ज थे। पुलिस ने उस पर कुल 1 लाख 90 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि वह फर्जी पहचान के सहारे गांव में कैसे रह रहा था और किन लोगों ने उसकी मदद की।

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