अयोध्या के सिरसा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा प्रवाचक आचार्य ज्ञान चन्द्र द्विवेदी ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण भारतीय संस्कृति की आत्मा कहा जाए तो इसमें कोई अत्युक्ति नहीं क्योंकि इसकी अभिव्यक्ति महर्षि व्यास की लेखनी की चरम परिणति है। भगवान व्यास जी को अमितबुद्धि तथा महामना कहा गया है। भागवत की रचना उनकी परिणत बुद्धि एवं भावप्रवण परिपक्व मन दोनों के योग से सहज रूप में हुई है इसलिए यह ग्रंथ ज्ञान कर्म और भक्ति का पावन प्रयाग हो गया है। भागवत जी की कथा ने आरंभ से ही जन सामान्य से लेकर भारतीय उत्कृष्ट मनीषा को अपनी ओर आकृष्ट किया है। पुराणों में वेदों के गूढ़ तत्वों का सरलीकरण लोक दृष्टि से अपनी विशिष्ट शैली में किया गया है।