कहा जाता है कि हनुमानजी की अनुमति के बिना राम तक पहुंचना कठिन है। हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन महंत प्रेमदास अक्षय तृतीया (30 अप्रैल) पर जब रामलला के दर्शन करेंगे तो यह आस्था और अनंत प्रेम की पुन: प्रतिष्ठा होगी। गद्दीनशीन महंत प्रेमदास कहते हैं कि हनुमान जी महाराज के आदेश पर ही वह रामलला के दर्शन करने जा रहे हैं। यह कहते हुए वे रो पड़ते हैं...। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जब मेरे रामलला ने पुकारा तब जा रहा हूं। इसके पीछे हनुमान जी महाराज की कृपा है। तीन महीने से रामलला के दर्शन का विचार चल रहा है। गद्दीनशीन होने के नाते हनुमानगढ़ी की परंपरा का निर्वहन करना होता है। हमने अपनी इच्छा हनुमानगढ़ी के पंचों के समक्ष रखी तो सभी ने एक राय होकर इसे स्वीकार किया। कहा कि रामलला से सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया...की कामना करेंगे। देश की सुरक्षा, शांति, समृद्धि के लिए सिर नवाएंगे। कहा कि रामलला के दर्शन उनके लिए साधना का चरम बिंदु है। गद्दीनशीन जब रामलला के सामने नतमस्तक होंगे तो मानो स्वयं बजरंगबली अपनी भक्ति अर्पित कर रहे होंगे क्योंकि सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन महंत को बजरंग बली का प्रतिनिधि माना जाता है। ऐसे में यह दर्शन सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि समूची सनातन परंपरा के लिए आस्था का दीपक प्रज्ज्वलित करेगा।