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अयोध्या में धान की बालियों और केले के तने के रेशे से बनी राखियां आकर्षण का केंद्र

अयोध्या में सुजानपुर शेरवाघाट स्थित महर्षि शृंगी ऋषि की तपोस्थली में आयोजित आठवें श्रीराम राखी पर्व महोत्सव में इस बार राखियां आकर्षण का केंद्र रहीं। केले के तने के रेशे से हाथों से तैयार की गई पवित्र राखियों के साथ ही उड़ीसा के कारीगरों द्वारा धान की बालियों से तैयार की गई राखियों ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा। प्राकृतिक सामग्री से तैयार इन राखियों में भारतीय परंपरा और स्थानीय शिल्प की झलक दिखाई दी। महोत्सव के दौरान इन दिव्य राखियों का वैदिक विधि-विधान से पूजन किया गया। आयोजकों के अनुसार केले के तने के रेशे से तैयार राखियां पूरी तरह हाथ से बनाई गई हैं। वहीं धान की बालियों से बनी राखियां इस वर्ष के आयोजन का विशेष आकर्षण रहीं। इनके निर्माण में धान की बालियों को कलात्मक ढंग से सजाकर राखी का स्वरूप दिया गया है। आयोजकों ने बताया कि राखियों के माध्यम से सनातन परंपरा के साथ प्रकृति और स्वदेशी शिल्प को जोड़ने का प्रयास किया गया है। अध्यक्ष सुभाष सिंह ने कहा कि केले के तने और धान से बनी राखियां आत्मनिर्भर भारत और सनातन परंपरा का प्रतीक हैं। इनका उद्देश्य भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के साथ भारतीय हस्तशिल्प और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग का संदेश देना भी है। महोत्सव में मां सरयू का 101 मीटर लंबी चुनरी से अभिनंदन और दुग्धाभिषेक किया गया। 2100 रामभक्तों ने सामूहिक सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ किया, जबकि काशी से आए 51 वेदपाठी बटुक ब्राह्मणों के वैदिक मंत्रोच्चार से परिसर राममय हो उठा। मां शांता देवी के मंदिर परिसर को हजारों किलो फूलों से सजाया गया था। संस्थापक सीताराम दास जी महाराज ने कहा कि मां शांता द्वारा भाई राम को राखी बांधने की परंपरा भाई-बहन के अटूट प्रेम और पारिवारिक संस्कारों का संदेश देती है। आयोजकों के अनुसार इस पर्व के माध्यम से विश्वभर में भाई-बहन के प्रेम का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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