अयोध्या से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां ठाकुर राम जानकी राम कचहरी मंदिर की संपत्ति को लेकर कब्जेदारी का विवाद गहरा गया है। मंदिर के महंत शशिकांत दास ने राजस्व अधिकारियों और विपक्षी पक्ष पर मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है। महंत शशिकांत दास के मुताबिक, मंदिर की संपत्ति को लेकर मामला एसडीएम कोर्ट में विचाराधीन था। सुनवाई के दौरान लेखपाल सर्वेश मिश्रा का बयान होना था। लेकिन कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद लेखपाल कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। इसी बीच आरोप है कि विपक्षी पक्ष के साथ मिलकर नायब तहसीलदार के यहां से गुपचुप तरीके से नया वसीयतनामा तैयार कराया गया और उसके आधार पर दाखिल-खारिज का आदेश भी करा लिया गया। महंत का कहना है कि इस मामले में पहले से ही ऊपरी अदालत में मुकदमा लंबित था, ऐसे में निचली अदालत को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं था। जब उन्हें इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने नायब तहसीलदार से मिलकर आपत्ति दर्ज कराई और अपने वकील के माध्यम से नोटिस भी भेजा। इसके बाद नायब तहसीलदार ने अपने आदेश को वापस ले लिया। वहीं महंत का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में उन्हें धमकियां भी मिलीं। जिसके बाद उन्होंने सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया। अदालत ने धारा 156(3) के तहत कोतवाली पुलिस को तीन दिन के भीतर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।