माघ पूर्णिमा पर रामनगरी अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू नदी में स्नान किया। इसके बाद रामलला, हनुमानगढ़ी समेत प्रमुख मंदिरों में दर्शन पूजन किया। माघ पूर्णिमा पर पुख्य नक्षत्र और प्रीति योग का भी संयोग रहा। माघ पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इसे 'महामाघी' भी कहते हैं। इस दिन पवित्र नदियों (विशेषकर गंगा) में स्नान, दान (तिल, कंबल) और भगवान विष्णु व लक्ष्मी जी की पूजा का विधान है। मान्यतानुसार, इस दिन देवता स्वर्ग से पृथ्वी पर आकर प्रयागराज में वास करते हैं। इससे पापों का नाश होता है और मोक्ष मिलता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं, इसलिए गंगा स्नान का विशेष फल मिलता है। इस दिन प्रयागराज में माघ महीने से चल रहा एक महीने का 'कल्पवास' या स्नान पूर्ण होता है। माना जाता है कि इस दिन देवता पृथ्वी पर संगम स्नान के लिए आते हैं, इसलिए इस दिन पूजा-पाठ का विधान है। इसी मान्यता के चलते सरयू में स्नान के लिए सुबह 4:00 बजे से ही भक्तों का तांता लग गया। भीषण शीतलहरी व कोहरे के बावजूद आस्था का तापमान चरम पर रही। सरयू में डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने रामलला के दरबार में भी हाजिरी लगाई। रामनगरी में चार पहिया वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है।