मैदान नहीं होने के कारण पुलिस, फौज, अर्ध सैनिक बलों की नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को भटकना पड़ रहा है। 10 से 20 किमी की दूरी तय कर महाविद्यालय के मैदान में तैयारी करने आते हैं। रमाबाई आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय के अलावा कहीं पर अच्छा मैदान नहीं है। जहां पर युवा वर्ग प्रतिदिन अच्छी कसरत कर सके। चुचैला कलां गांव निवासी विशाल कुमार का कहना है कि वह डेकाथलोन की तैयारी के लिए रोजाना महाविद्यालय के मैदान में आतेे हैं। उनके गांव की यहां से दूरी 20 किमी है। आस पास कोई मैदान नहीं है। इसलिए यहां पर आना पड़ता है। आकाश कुमार खाद गुर्जर से आते हैं। वह आर्मी की तैयारी करने के साथ ही अन्य युवाओं को भी तैयारी करातेे हैं। अटारी मुरीदपुर की दूरी 10 किमी है। यहां के अंशु आर्मी की तैयारी के लिए दौड़ का अभ्यास करने प्रति दिन लंबी दूरी तय कर मैदान में आते हैं। नवादा का विशाल दिल्ली पुलिस की तैयारी कर रहा हैै। आजाद नगर का नीरज बीएसएफ में जाने के लिए मैदान में पसीना बहाता है। सुल्तान नगर मोेहल्लेे का अभय शर्मा आर्मी की भर्ती देख रहा है। उपरोक्त सभी युवाओं नेे बताया कि महाविद्यालय के मैदान के अलावा कोई मैदान नहीं हैै। जहां पर दौड़ लगा सकें और कसरत कर सकें। पुलिस या सेना में जाने के लिए दौड़ बेहद जरूरी है। जिसके लिए लंबी तैैयारी करनी पड़ती हैै। यहां पर प्रतिदिन तैयारी करने के लिए आ जाते हैं। तैैयारी कर रहे युवाओं ने बताया कि यहां पर आते समय रास्ते में हादसे का डर बना रहता हैै। मगर भविष्य की चिंता यहां आने के लिए मजबूर करती है।