शोहदा-ए-कर्बला की याद में सात मोहर्रम का मातमी जुलूस अजाखाना कटरा गुलाम अली से बरामद हुआ। जुलूस में सबसे आगे ऊंटों का काफिला था। अराईश की खासियत ये थी कि हर तख्त पर ऊंची छतरी का साया था। इसके अलावा जुलूस में चांदी का झूला था जो हजरत इमाम हुसैन के काफिले में उनके छह माह के बेटे हजरत अली असगर की मासूम शहादत की याद ताजा कर रहा था। मैदाने कर्बला में हुरमला ने अपने तीर से इमाम हुसैन के हाथों पर मासूम अली असगर को कत्ल कर दिया था। रौशन चौकियों को रंगबिरंगी कागज के फूलों से सजाया गया था।