कांवड़ियों के जत्थे गुजरने से धनौरा-गजरौला मार्ग शिवमय हो गया। कांवड़िये बड़े हों या किशोर सब पर भगवान शिव की भक्ति का रंग चढ़ा है। कोई सुख समृद्धि के लिए कांवड़ ला रहा तो किसी ने जीवन में सफलता की कामना की है। पिता के स्वास्थ्य की कामना के लिए पैदल कांवड़ ला रहे सगे भाइयों दस साल के प्रशांत पाठक और 12 वर्षीय गोविंद को देख हर कोई हैरत में रह गया। महाशिवरात्रि 26 फरवरी को है। जिसके निकट आते ही कांवड़ियों के बेड़े हरिद्वार से कांवड़ में गंगा जल लेकर लौटने लगे।