अयोध्या–प्रयागराज रेल मार्ग पर स्थित रामगंज रेलवे स्टेशन पूरी तरह उपेक्षा का शिकार है। करीब छह दशक पहले बना यह स्टेशन अब बदहाली की मिसाल बन गया है। छत जगह-जगह से टूट चुकी है, दीवारों में गहरी दरारें नजर आती हैं। प्लेटफार्म पर शेड की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे यात्रियों को धूप और बारिश में खुले में बैठकर इंतजार करना पड़ता है। बेंचों की संख्या सीमित है और जो लगी हैं, वे टूट चुकी हैं। स्टेशन परिसर में झाड़ियां उगी हैं, कचरे का ढेर है और सफाई व्यवस्था नदारद है। पेयजल के लिए लगा एकमात्र हैंडपंप अक्सर खराब रहता है। प्रसाधन गृह की स्थिति बेहद खराब है। दरवाजे-खिड़कियां गायब हैं, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों को कठिनाई होती है। कोविड से पहले स्टेशन पर सरयू एक्सप्रेस सहित चार ट्रेनों का ठहराव होता था। अब केवल दो पैसेंजर ट्रेनों अयोध्या-प्रयागराज अप और डाउन का संचालन हो रहा है। टिकट काउंटर भी लंबे समय से बंद है। इससे यात्रियों को टिकट के लिए भटकना पड़ता है या फिर बिना टिकट यात्रा करनी पड़ती है, जिससे उन्हें जुर्माने का भय बना रहता है। व्यावसायिक दृष्टि से भी अहम है स्टेशन रामगंज से सीआरपीएफ कैंप, इंडेन गैस और एसएलएमजी प्लांट के कर्मी, छात्र, व्यापारी और मजदूर प्रतिदिन सुल्तानपुर, अयोध्या, प्रतापगढ़ व प्रयागराज की यात्रा करते हैं। इतना उपयोगी स्टेशन होने के बावजूद इसे लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। यात्री सुविधाएं हों बहाल भादर निवासी अभिषेक सिंह का कहना है कि स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। ग्राम प्रधान विनोद कनौजिया के अनुसार टिकट काउंटर बंद होने से यात्री चालान के डर में सफर कर रहे हैं। व्यापारी प्रमोद कुमार ने मांग की कि सरयू एक्सप्रेस का ठहराव फिर शुरू किया जाए और स्टेशन को व्यवस्थित किया जाए। बढ़ाई जाएगी सुविधा पीपरपुर के स्टेशन मास्टर सियाराम मीना का कहना है कि रामगंज रेलवे स्टेशन हाल्ट श्रेणी में आता है। यहां दो मेमू ट्रेनों का ठहराव है। हाल्ट स्तर के अनुसार सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। यात्रियों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।