अमेठी में गौरीगंज जिला मुख्यालय स्थित रामलीला मैदान से सनातन हिंदू एकता पदयात्रा की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में आयोजक मंडल के युवा सनातनी बसंत तिवारी और चंद्रकांत तिवारी के साथ सैकड़ों रामभक्त शामिल हुए। जय श्रीराम के जयघोष और मंत्रोच्चार के बीच पहले सुंदरकांड का पाठ हुआ। इसके बाद हवन-पूजन कर पदयात्रा रवाना की गई। पदयात्रा गौरीगंज से निकलकर मुसाफिरखाना और थोड़ी इनायत नगर होते हुए 1 फरवरी को अयोध्या पहुंचेगी। अयोध्या में रामलला के दर्शन के बाद यात्रा का समापन होगा। आयोजकों ने बताया कि यात्रा का उद्देश्य सनातन संस्कृति और आपसी एकता का संदेश समाज तक पहुंचाना है। यात्रा में शामिल कथा व्यास सुभाष चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि सनातन परंपराएं कमजोर पड़ने का कारण समाज की उदासीनता है। उन्होंने युवाओं से अपनी पहचान के प्रति सजग रहने और सनातन संस्कारों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिखा, जनेऊ, गीता और गाय हमारी संस्कृति के प्रतीक हैं, जिनकी रक्षा करना सभी का दायित्व है। कथा व्यास देवव्रत महाराज ने कहा कि यह पदयात्रा किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज को जाति और वर्ग में बांटने के बजाय एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने प्रभु राम के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए त्याग, समर्पण और समरसता का संदेश दिया। कार्यक्रम में संत परंपरा, सामाजिक मूल्यों और सनातन संस्कृति पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। आयोजकों ने बताया कि पूरी यात्रा के दौरान शांति, अनुशासन और धार्मिक मर्यादाओं का पालन किया जाएगा।