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अमेठी में जिला अस्पताल में फेको मशीन नहीं, चीरा विधि से हो रहे ऑपरेशन

अमेठी में जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए आधुनिक फेको मशीन का अब तक इंतजार है। जबकि यहां दो फेको प्रशिक्षित चिकित्सक तैनात हैं। मशीन के अभाव में मरीजों का ऑपरेशन पारंपरिक चीरा विधि से किया जा रहा है, जिससे उन्हें अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। 100 बेड के जिला अस्पताल में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और ब्लड बैंक जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन नेत्र रोगियों के लिए आधुनिक ऑपरेशन व्यवस्था नहीं है। नेत्र विभाग में डॉ. राजीव वैश्य और डॉ. कुमुद सिंह फेको प्रशिक्षित हैं, जबकि डॉ. अजय कुमार वर्मा भी नेत्र सर्जन हैं। इसके बावजूद संसाधनों की कमी के कारण आधुनिक तकनीक का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। तीनों चिकित्सकों ने 1100 से अधिक आंखों के ऑपरेशन चीरा विधि से किए हैं। इनमें करीब 692 मोतियाबिंद और 400 से अधिक ग्लूकोमा, नाखूना व अन्य रोगों के मरीज शामिल हैं। चीरा विधि में मरीजों को दर्द और अधिक समय तक परेशानी का सामना करना पड़ता है, जबकि फेको तकनीक से बिना चीरा ऑपरेशन संभव है। फेको मशीन न होने के कारण मरीजों को आधुनिक इलाज के लिए अन्य शहरों या जनपदों का रुख करना पड़ रहा है। यहां तक कि मेडिकल कॉलेज में भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि फेको मशीन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। मशीन मिलने के बाद मरीजों को बेहतर और आधुनिक उपचार मिल सकेगा। फेको मशीन अल्ट्रासोनिक तरंगों से आंख के खराब लेंस को छोटे टुकड़ों में तोड़कर निकालती है और उसकी जगह कृत्रिम लेंस लगाया जाता है। इस प्रक्रिया में चीरा नहीं लगाना पड़ता और मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है।

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