जलालपुर (अंबेडकरनगर)। तमसा नदी के शांत किनारे पर स्थित पक्का घाट का प्राचीन शिवाला सावन में श्रद्धा और कौतूहल का अनूठा संगम बन जाता है। करीब तीन सौ वर्ष पुराने इस शिव मंदिर में विराजमान भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। सावन के महीने में यहां दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर के पुजारी पं. रामदौर बताते हैं कि शिवलिंग के सामने दो पाइप लगे हैं। इन पाइप में फूंक मारने पर जल सीधे शिवलिंग पर गिरता है। श्रद्धालुओं के अनुसार जल न दाएं जाता है और न बाएं, बल्कि सीधे शिवलिंग पर पहुंचता है। यह जल कहां से आता है इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। इस अनोखी मान्यता को लोग भगवान शिव की कृपा से जोड़कर देखते हैं। यही वजह है कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इस परंपरा को देखने के लिए भी उत्सुक रहते हैं। तीन सौ साल पुरानी आस्था स्थानीय श्रद्धालु सुरेंद्र सोनी ने बताया कि तमसा नदी के किनारे बसे इस प्राचीन शिवालय का धार्मिक महत्व लंबे समय से लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक मंदिर करीब तीन शताब्दी पुराना है। सावन में भोर होते ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो जाती है। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा परिसर शिवमय हो उठता है। सावन के प्रत्येक सोमवार और अन्य दिनों में भी बड़ी संख्या में शिवभक्त यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालु तमसा नदी से जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मनोकामना मांगते हैं। इसके अलावा छठ पूजा, जन्माष्टमी, दीप उत्सव सहित विभिन्न धार्मिक अवसरों पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। तमसा नदी का किनारा और प्राचीन मंदिर का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति कराता है।