जलालपुर नगर के चिलवनिया स्थित ऐतिहासिक कर्बला बड़ी दरगाह में सोमवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामनेई के 40वें के अवसर पर सर्वधर्म शोक सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं, विद्वानों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे ईरान के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की मित्रता सदियों पुरानी है। उन्होंने कहा कि कठिन समय में भारत की जनता द्वारा ईरान के प्रति दिखाई गई सहानुभूति को कभी भुलाया नहीं जा सकता। लखनऊ की टीले वाली मस्जिद के पेश इमाम मौलाना फ़ज़ले मन्नान रहमानी ने कहा कि यह घटना पूरी मिल्लत को एकजुट करने वाली है। वहीं स्वामी श्री सारंग जी महाराज ने भारत की जनता द्वारा ईरान के साथ खड़े होने की बात कही। कार्यक्रम में ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव मौलाना यासूब अब्बास, मौलाना कल्बे रूशैद, मौलाना तकी हैदर नक़वी, मौलाना फ़ज़ले मुमताज जौनपुर, मौलाना मोहम्मद मोहसिन फैजाबाद, प्रोफेसर अब्बास रज़ा नय्यर, ख्वाजा शिफाअत हुसैन और मौलाना नजीबुल्लाह सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे और श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के सफल आयोजन में इब्ने अली जाफरी, अहसन रज़ा मीसम, मोहम्मद अब्बास राजा का विशेष सहयोग रहा। अंत में मौलाना रईस हैदर ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह के प्रति आभार व्यक्त किया।