टारे-टरे न लेख के जरिए संदेश दिया गया कि समय बदले या जन्म-जन्मान्तर, लेकिन विधि का विधान नहीं बदला जा सकता। सुग्गा -सुग्गी के संगम स्नान से शुरू हुई कहानी श्रवण कुमार की लोकगाथा में परिवर्तित होकर राजा दशरथ के पुत्र वियोग में प्राण त्यागने तक दर्शकों को रोमांचित करती रही। इस प्रस्तुति में सूत्रधारों की भूमिका में कंचन लाल यादव, अभयराज यादव एवं मनोज कुमार ने कहानी को बड़े ही सलीके से पेश किया।