डांट, अपमान, अनदेखी और डर से किशोरवस्था में ही बच्चों का आत्मविश्वास व मानसिक संतुलन गड़बड़ा जाता है। वह बोलते नहीं लेकिन इसके घाव बहुत गहरे हैं। भीतर से यह उन्हें खोखला कर देता है। यह खुलासा एएमयू के मनोविज्ञान विभाग में हुए एक अध्ययन हुआ है। घर और स्कूल जैसे सुरक्षित माहौल में किशोर भावनात्मक शोषण के शिकार हो रहे हैं।