सरकार का पूरा जोर विकास पर है। शहर-शहर विकास के प्रोजेक्ट शुरू कराए जा रहे हैं। लेकिन हमारे विधायक अपने क्षेत्र की सड़कों को भी चलने काबिल नहीं बना पा रहे। पेयजल का संकट दूर नहीं करा पा रहे। यह स्थिति तो तब है जब विधायकों की निधि में ढाई ढाई करोड़ की रकम पड़ी है। शहर, अतरौली और बरौली के विधायक निधि को कहां खर्च करना है, क्या काम कराना है इसके प्रस्ताव तक नहीं दे रहे हैं। जबकि सिस्टम लगातार इन्हें निधि के बारे में याद दिला रहा है। पत्र भेजे जा रहे हैं। अगर यह विधायक सड़कों को दुरुस्त कराने के ही प्रस्ताव दे देते थे तो तमाम सड़कों को दुरुस्त कराया जा सकता था।