मूक बधिरों की बात हर कोई समझ नहीं पाता है। वो अगर पीड़ित हों तो पुलिस उनकी भाषा कैसे समझ सकती है। थाने आएं या फिर रास्ते में भटकते मिल जाएं तो सिर्फ इशारों से बात कर समाधान खोजा जा सकता है। मंगलवार को पुलिस लाइन मैदान में डिवीजन एसोसिएशन ऑफ द डेफ की तरफ से अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर पुलिस कर्मियों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। संस्था के महासचिव गौरी शंकर गर्ग ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस और बधिर समुदाय के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना है। जिससे एक सुरक्षित और समावेशी समाज की स्थापना की जा सके। एसोसिएशन के सदस्य पुलिसकर्मियों को सांकेतिक भाषा के मूल शब्द और संकेत सिखाएं। यह स्वतंत्रता, सम्मान और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।