आगरा के राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ संस्थान में ड्रग रेजिस्टेंट के मरीजों की जिनोम सीक्वेंसिंग कर इलाज किया जा रहा है। इससे मरीजों में दवाओं का असर होगा और वह जल्द ठीक हो सकेंगे। वैज्ञानिक डॉक्टर राजकमल ने बताया कि दवाई बीच में छोड़ने और खुद की डॉक्टरी करने से कुष्ठ रोग मरीज ड्रग रेजिस्टेंट हो रहे हैं। इससे दवाएं बेअसर होन लगती हैं। ऐसे में इनकी जिनोम सीक्वेंसिंग करने के बाद उन दवाओं को चिह्नित किया जाता है, जिससे बीमारी को ठीक किया जा सके। डॉक्टर विवेक गुप्ता ने बताया कि हर महीने करीब नए एक हजार मरीज आ रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा फिरोजाबाद, टूंडला, लखीमपुर खीरी, कानपुर, बदायूं, बरेली के हैं। प्रदेश की बात करें तो 10 हजार की आबादी में से एक को ही यह बीमारी मिल रही है। झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र में प्रति 10000 में से एक से अधिक मरीज पाए जा रहे हैं। एक साल के इलाज में कुष्ठ रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है। मुख्य अतिथि मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि कुष्ठ की बीमारी में कई बार मरीज मानसिक विकार भी पनप जाते हैं । ऐसी स्थिति में उनकी काउंसलिंग भी की जाती है।