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VIDEO: सॉस, चिप्स, बिस्किट से बच्चे की फूल रही सांस, आठ फीसदी अस्थमा के शिकार; चिकित्सकों ने दी चेतावनी

सामान्य परेशानी में एंटीबायोटिक दवा का इस्तेमाल और डिब्बा बंद भोजन के बढ़ते चलन से बच्चों को एलर्जी हो रही है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति से बच्चे अस्थमा से पीड़ित हो रहे हैं। एमजी रोड स्थित होटल में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक (आईएपी) की एलरकॉन-2026 कार्यशाला में डॉक्टरों ने इस पर चिंता जताई। आईएपी एलर्जी एंड एप्लाइड इम्युनोलॉजी की राष्ट्रीय सचिव डॉ. सौम्या नागराजन ने बताया कि 20-25 फीसदी बच्चों में त्वचा, पेट रोग और फूड एलर्जी मिल रही है। ऐसे बच्चों में 7-8 फीसदी में अस्थमा की दिक्कत बन रही है। बीते 8-10 साल में प्रिजर्वेटिव फूड (जैम, जेली, अचार, सॉस, चिप्स, बिस्किट, नमकीन, पैकेटबंद जूस) समेत कई खाद्य सामग्री में पाए जाने वाले रासायनिक तत्व और एंटीबायोटिक दवाओं की ओवरडोज से एलर्जी बढ़ रही है। चेन्नई की डॉ. नर्मदा ने बताया कि घर में झाडू लगाने, पर्दे, तकिया, गद्दे, सोफा, चादर, कालीन की धूल (डस्ट माइट), पालतू जानवरों के बाल-रूसी से भी एलर्जी हो रही है। इससे बार-बार छींक, नाक बहना, खुजली समेत अन्य परेशानी हो रही है। नई दिल्ली के डॉ. नीरज गुप्ता ने बताया कि वाहनों-कारखानों का धुआं, निर्माण के चलते धूल और परागकणों से सांस नलिकाएं संकुचित होकर संक्रमित होती हैं। इससे अस्थमा-एलर्जी बन रही है।

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