जीते जी यही इच्छा कि अपनों के हाथ से अंतिम संस्कार हो। वक्त ने साथ न दिया और गैरों को दाह करना पड़ा। रिश्ते भी देखिए...शरीर का साथ क्या छूटा संबंधों की डोर भी टूट गई। खोजबीन में सगे-संबंधियों का पता भी चला, लेकिन कई आए ही नहीं। बुधवार को श्राद्ध पक्ष भी खत्म हो रहा है। ऐसे में ज्ञात-अज्ञात की 1822 अस्थियां दो साल से संस्कार का इंतजार कर रही हैं। ताजगंज के विद्युत मोक्षधाम में अभी 1822 अस्थियां लॉकर में रखी हैं। इनमें 1230 अज्ञात और 593 ज्ञात लोगों की हैं। पुलिस की ओर से लावारिश में इनका विद्युत शवदाह गृह में दाह कराया।