लक्ष्मी मजबूर थीं और बचपन में अपने खुद के ब्याह को रोक नहीं पाईं। लेकिन जब आंखें खुलीं तो पता चला कि बहुत कुछ खो गया। फिर वे महिला समाख्या संगठन से जुड़ीं और अब अपने गांव-देहात में सुनिश्चित कर रहीं हैं कि जिस हद तक हो सके, बाल विवाहों को रोका जाए।
31 August 2026
30 August 2026
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