राजधानी शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर के टेवरन हॉल में आयोजित कला एवं शिल्प मेले में इस बार मधुबनी और वर्ली साड़ियां महिलाओं की पहली पसंद बनकर उभरी हैं। मेले में पहुंचने वाली महिलाएं इन साड़ियों की बारीक हस्तकला, पारंपरिक डिजाइनों और ग्रामीण जीवन को दर्शाने वाली चित्रकारी को खूब पसंद कर रही हैं। झारखंड से आए कारीगर शबीर ने बताया कि मधुबनी साड़ियां अपनी जटिल और आकर्षक चित्रकला के लिए प्रसिद्ध हैं। इन पर भारतीय लोक संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के विभिन्न दृश्य बेहद बारीकी से उकेरे जाते हैं। वहीं वर्ली साड़ियां अपनी सरल ज्यामितीय आकृतियों और जनजातीय कला शैली के कारण अलग पहचान रखती हैं। कारीगरों के अनुसार इन साड़ियों को तैयार करने में काफी समय, धैर्य और मेहनत लगती है। हर साड़ी केवल एक परिधान नहीं बल्कि भारतीय लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की एक कहानी को अपने रंगों और चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। मेले में मधुबनी कला से सजे सूट 1,800 रुपये, मधुबनी साड़ियां 3,500 रुपये, जबकि वर्ली आर्ट वाले सूट 1,500 रुपये से 3,500 रुपये तक उपलब्ध हैं। पारंपरिक हस्तशिल्प और हस्तनिर्मित परिधानों में रुचि रखने वाले लोग इन उत्पादों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। कारीगरों का कहना है कि ऐसे मेले न केवल उनकी कला को पहचान दिलाते हैं बल्कि देशभर की पारंपरिक लोक कलाओं को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।