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लाइव रिपोर्ट: एचपीयू में कर्मचारियों के वेतन का संकट गहराया, दसवें दिन भी शिक्षकों और कर्मचारियों का विरोध जारी

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में वेतन का संकट बरकरार है। अक्तूबर का वेतन अब तक जारी नहीं हुआ है, जिससे शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों में गहरा रोष है। प्रदर्शन सोमवार को दसवें दिन में पहुंच गया और यह विश्वविद्यालय के इतिहास में दूसरा सबसे लंबा वेतन बैकलॉग बन गया है। विश्वविद्यालय के लगभग 1600 शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी लगातार विरोध पर हैं। वेतन नहीं मिलने से आक्रोशित कर्मचारियों ने सभी प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों का बहिष्कार कर रखा है। कक्षाएं बंद हैं, दफ्तरों में ताले लटके हैं और विद्यार्थियों को विभिन्न विभागों में कार्य निपटाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ और वेतन संघर्ष समिति ने सरकार पर विश्वविद्यालयों के प्रति सौतेला रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार हर विभाग को समय पर वेतन दे रही है, लेकिन विश्वविद्यालयों के अनुदान में जानबूझकर देरी की जा रही है। कर्मचारियों को बैंक ऋण, बच्चों की फीस और घरेलू खर्च पूरे करने में कठिनाई हो रही है। कर्मचारियों और नेताओं ने कहा कि यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम नहीं बल्कि उच्च शिक्षा के प्रति सरकार की उपेक्षा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के इतिहास में यह दूसरा मौका है जब कर्मचारियों को इतना लंबा इंतजार करना पड़ा है। जब तक वेतन खातों में नहीं पहुंचता और ग्रांट की स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती तब तक न तो कक्षाएं होंगी और न ही कोई कार्यालय खुलेगा। धरने के कारण विश्वविद्यालय की सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप पड़ी हैं। छात्र संगठनों ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर इस संकट का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।

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