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Rajasthan News: बाघिन सुल्ताना का बेटा T-2512 रणथंभौर से कोटा पहुंचा, इस टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने की तैयारी

Sun, 28 Sep 2025 09:11 PM IST
सवाई ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर/कोटा

राजस्थान के सबसे बड़े रणथंभौर टाइगर रिजर्व से बाघों का दूसरे इलाकों की ओर जाना लगातार जारी है। इस बार रणथंभौर की मशहूर बाघिन सुल्ताना (टी-107) का युवा शावक बाघ टी-2512 टेरेटरी की तलाश में रणथंभौर से निकलकर कोटा जिले की खातोली रेंज के बालूपा गांव के पास पहुंच गया है। यहां पिछले कई दिनों से बाघ का मूवमेंट देखा जा रहा है।
 
बाघ की मॉनिटरिंग के लिए बनी छह सदस्यीय टीम
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक शिखा मेहरा ने बाघ टी-2512 की लगातार निगरानी के लिए छह सदस्यीय टीम का गठन किया है। यह टीम एनटीसीए की मानक कार्यप्रणाली (SOP) के अनुसार काम करेगी और प्रतिदिन की मॉनिटरिंग रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। टीम में कोटा के उप वन संरक्षक अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव, एनटीसीए के प्रतिनिधि मोहम्मद साजिद सुल्तान, वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद माथुर, टाइगर वॉच से डॉ. धर्मेंद्र खांडल, ग्राम पंचायत बालूपा के वार्ड पंच महावीर मीना और रणथंभौर टाइगर परियोजना के क्षेत्र निदेशक अनूप के.आर. शामिल हैं।
 
रणथंभौर में क्षमता से ज्यादा बाघ
वन विभाग के अनुसार, रणथंभौर में इस समय लगभग 78 बाघ मौजूद हैं, जबकि इसकी क्षमता केवल 50 से 55 बाघों की है। संख्या बढ़ने के कारण टेरिटरी की कमी हो रही है, जिसके चलते कई युवा बाघ नए क्षेत्रों की ओर निकल जाते हैं। बाघ टी-2512 भी इसी कारण रणथंभौर छोड़कर कोटा की ओर पहुंचा है।

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कॉरिडोर बन रहा बाघों का नया रास्ता
वन्यजीव विशेषज्ञ धर्मेंद्र खांडल ने बताया कि जिस रास्ते से बाघ टी-2512 कोटा पहुंचा है, वह धीरे-धीरे बाघों के लिए एक कॉरिडोर के रूप में विकसित हो रहा है। इससे पहले भी रणथंभौर के बाघ ब्रोकन टेल, टी-98 और टी-35 इसी रास्ते से कोटा के मुकुंदरा और मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व तक पहुंचे थे। खांडल के अनुसार यह कॉरिडोर वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से शुभ संकेत है और भविष्य में बाघों व अन्य वन्यजीवों की आवाजाही को सुरक्षित बनाएगा।
 
मुकुंदरा में शिफ्ट होगा टी-2512
गठित टीम ने निर्णय लिया है कि बाघ टी-2512 को रणथंभौर वापस नहीं ले जाया जाएगा। उसे जल्द ही सुरक्षित तरीके से ट्रैंकुलाइज कर कोटा के मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया जाएगा। इस समय वन विभाग की टीमें पार्वती नदी और आसपास के क्षेत्रों में बाघ के पदचिह्नों की तलाश रही हैं।

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