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Balotra News: पचपदरा में जर्जर विद्यालय भवन का हिस्सा ढहा, दो गौवंशों की दबकर मौत

Tue, 22 Jul 2025 02:29 PM IST
जैसलमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा

बालोतरा (पचपदरा) कस्बे के तहसील कार्यालय रोड पर स्थित एक पुराने व वर्षों से बंद पड़े सरकारी स्कूल भवन का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। हादसे में कमरे के भीतर बारिश से बचने के लिए छिपे दो गौवंश मलबे में दब गए, जिनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने न सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता को उजागर किया है, बल्कि क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश भी पैदा कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह भवन राजकीय सीनियर उच्च माध्यमिक विद्यालय का पुराना ढांचा है, जो वर्ष 1992 से ही उपयोग में नहीं लिया गया है। विद्यालय के लिए नया भवन बनने के बाद यह पुराना हिस्सा वर्षों से वीरान पड़ा हुआ था। समय के साथ यह इमारत पूरी तरह जर्जर होती चली गई और अब इसकी हालत इतनी भयावह हो चुकी है कि उसके आसपास खड़े रहना भी खतरे से खाली नहीं है।

बीते कई दिनों से क्षेत्र में लगातार रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जिससे पहले से ही कमजोर हो चुका भवन और भी अधिक नमी व दबाव नहीं सह सका। और अचानक भवन का एक कमरा भरभराकर गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के समय उस कमरे में दो आवारा गौवंश बारिश से बचने के लिए छिपे हुए थे। मलबा इतना भारी था कि उन्हें बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

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स्थानीय निवासियों ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से इस भवन को गिराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता की वजह से यह हादसा हुआ है और यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते, तो इस तरह की घटना रोकी जा सकती थी।

ग्रामीणों ने बताया कि भवन के आसपास के बच्चे रोज इसी परिसर में खेलते हैं। हादसे वाले कमरे से कुछ ही दूरी पर दो बच्चे खेलते नजर आए थे, जो समय रहते वहां से हट गए। यदि यह हादसा कुछ पल पहले होता, तो जानमाल की बड़ी हानि हो सकती थी। हादसे के बाद से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों ने मांग की है कि इस खंडहरनुमा ढांचे को तत्काल गिराया जाए और भविष्य में ऐसी लापरवाही ना हो, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। एक ग्रामीण ने रोष व्यक्त करते हुए कहा, जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक प्रशासन आंखें मूंदे रहता है। क्या अब भी किसी इंसानी जान की कीमत चुकाने का इंतजार किया जाएगा?

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