बहरोड़ के रिहायशी इलाके में घुसे पैंथर को सोमवार को रेस्क्यू कर लिया गया है। वन विभाग टीम पैंथर को ट्रंक्यूलाइज करके सरिस्का ले गई। बहरोड़ में घुसे पैंथर को 24 घंटे में पकड़ लिया गया। वहीं अलवर के राजऋषि कॉलेज में आए पैंथर को आठ दिन बाद भी पकड़ा नहीं जा सका है। ये पैंथर वन विभाग से आंख मिचौली कर रहा है।
ये पैंथर अगर नहीं पकड़ा जाता तो डर से मर जाता, क्योंकि जब से इस पैंथर को देख गया तब से जबरदस्त भीड़ वहां इकट्ठा हो गई। लोगों की भीड़ को देखते हुए पैंथर इधर से उधर दौड़ता रहा। आखिर में ये पैंथर तसिंग रोड पर जेतपुरा मोहल्ले में एक मकान में जाकर छिप गया, जहां कोई रिहाइश नहीं है। वन विभाग इससे पहले इसे ट्रंक्यूलाइज करने के लिए शॉट भी लगा चुका था। मकान में जाकर यह वो बेसुध हो गया। वन विभाग के लोग इसे उठाकर बाहर ले आए। जिस समय इसे बाहर लाकर पिंजरे में रखा गया, तब जबरदस्त भीड़ वहां एकत्र हो गई। यह पैंथर 24 घंटे से ज्यादा खुले में नहीं रह सका और इसे रेस्क्यू कर लिया गया।
वहीं, अलवर में राजऋषि कालेज में घुसे पैंथर को आठ दिन हो गए और यह अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। यह पैंथर वन विभाग के लोगों से आंख मिचौली कर रहा है। हर रोज रात होने के बाद यह पिंजरे तक आता है और वहां घूम फिर कर लौट जाता है। वन विभाग ने इस पैंथर को पकड़ने के लिए दो दो पिंजरे लगा रखे हैं। ट्रैप करने के लिए कई कैमरे भी लगा दिए हैं। पैंथर कैमरे में ट्रैप भी हो रहा है और पिंजरे के आसपास इसके पगमार्क रोजाना मिल रहे हैं, लेकिन यह पिंजरे में अंदर नहीं जाता। एक बार यह पैंथर कालेज से बाहर रिहायशी कालोनी में आ चुका है, लेकिन वापस फिर कालेज में ही चला जाता है। पैंथर के खुला घूमने से कालोनी के लोग भी डरे और सहमे हुए हैं। लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे। ये पैंथर सरिस्का में टाइगरों की संख्या बढ़ने से पेरिफेरी रेंज से बाहर रिहायशी इलाकों में आ रहे हैं। जब तक जंगल मानवीय दखल से पूरी तरह मुक्त नहीं होगा यह समस्या आती रहेगी।