बाढ़ थम गई है, परंतु सतलुज दरिया गुस्से में है, जो अभी भी ग्रामीणों की जमीनें खुद में समाने में लगा हुआ है। दरिया द्वारा की जा रही बर्बादी को रोकने कि लिए बीएसएफ महिला प्रहरी और जवानों ने कमान अपने हाथ में लेकर बांध मजबूती में जुट गए हैं। उल्लेखनीय है कि अमर उजाला में रविवार के संस्करण में दरिया से जमीन और गांव को बचाने की जद्दोजहद खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन और बीएसएफ गांव निहाले वाला में बांध मजबूत करने पहुंची है। ग्रामीण प्रवीण धवन व सरपंच बोहड़ सिंह ने बताया कि गांव निहाले वाला में बांध की मरम्मत के लिए युद्ध स्तर पर कार्य चल रहा है। गांव निहाले वाला में सतलुज दरिया का पानी गांव की मिट्टी को काटकर अपने में समा रहा था। धीरे-धीरे यह गांव की लगभग 40 एकड़ जमीन अपने में समा गया था। दरिया गांव तक पहुंचने लगा था। गांव के लोगों ने बांध की मजबूती के लिए जिला प्रशासन से मांग की थी। रविवार को जिला प्रशासन और बीएसएफ के जवान गांव में पहुंचे और वहां पर मिट्टी के बैग भर कर बांध पर लगाने लगे। सतलुज में नोचें बनाई जा रही है। ताकि पानी खेत की मिट्टी को काटकर अपने में ना मिला सके। उन्होंने बताया कि रविवार भी दरिया गांव निहाले वाला की एक एकड़ जमीन निगल गया है। बीएसएफ की महिला प्रहरी भी मिट्टी के भरे बैग दरिया के किनारे लगा बांध मजबूती में अपना योगदान दे रही हैं। सरपंच ने कहा कि ये सरहद पर बंदूक लेकर देश की रक्षा करने के साथ सीमावर्ती गांवों के ग्रामीणों की मदद भी कर रहे हैं। आज लगभग सात गांवों की संगत भी बांध मजबूती में सहयोग देने पहुंची है।