साल 2026 में हाथ खड़े कर होने वाले चंडीगढ़ मेयर चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (आप) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। बुधवार को पार्टी के दो पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के बाद आप अलर्ट मोड में आ गई है। पार्टी अब यह मंथन कर रही है कि यह टूट कैसे हुई और आगे किसी भी सूरत में और पार्षद न टूटें इसके लिए रणनीति बनाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी अपने बचे हुए पार्षदों को एकजुट रखने के लिए टूर प्लान पर भी विचार कर रही है। चर्चा है कि पार्षदों को पंजाब के बाहर ले जाना जोखिम भरा हो सकता है इसलिए यदि टूर होगा भी तो वह पंजाब के भीतर ही सीमित रहेगा। पार्टी को इस बात की भी चिंता है कि भाजपा मेयर चुनाव से पहले दो और पार्षदों को अपने साथ जोड़ने का दावा कर रही है। आप नेतृत्व को यह भी चिंता सता रही है कि वर्ष 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव अहम साबित होंगे। चंडीगढ़ में पार्टी का प्रदर्शन पंजाब की राजनीति पर सीधा असर डाल सकता है। ऐसे में यहां कमजोर प्रदर्शन पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। पार्टी के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार होने के बावजूद पंजाब की सीमा से सटे चंडीगढ़ से पार्षदों का भाजपा में जाना कहीं पार्टी नेतृत्व और पार्षदों के बीच कमजोर संवाद का नतीजा तो नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी स्तर पर गहन मंथन किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी केंद्रीय नेतृत्व को दे दी गई है और अगले वर्ष नगर निगम चुनाव को देखते हुए पार्टी बचे पार्षदों को टूट से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। फिलहाल निगम में दोनों पक्षों के पास 18-18 पार्षद हैं और मुकाबला बराबरी का बना हुआ है।