जून 1984 के सैन्य अभियान की स्मृति में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से गुरुद्वारा मंजी साहिब के बाहर विशेष फोटो प्रदर्शनी लगाई गई। इस दौरान एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि जून का महीना सिख पंथ के लिए दर्द और शहादत की यादों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि 1984 में शहीद हुए सिंहों, सिंहनियों और बच्चों की तस्वीरें देखकर आज भी सिख समुदाय भावुक हो जाता है। धामी ने कहा कि उस दौर में श्री अकाल तख्त साहिब की रक्षा के लिए संत बाबा जरनैल सिंह खालसा भिंडरांवाले और उनके साथियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी सेना का डटकर मुकाबला किया और इतिहास रचा। उन्होंने नई पीढ़ी को सिख इतिहास से जोड़ने तथा कौम को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने का आह्वान किया। एसजीपीसी अध्यक्ष ने लंबे समय से जेलों में बंद बंदी सिंहों की रिहाई की मांग दोहराते हुए कहा कि भाई बलवंत सिंह राजोआणा, भाई जगतार सिंह हवारा, भाई दविंदरपाल सिंह भुल्लर, भाई गुरदीप सिंह खैहरा और भाई जगतार सिंह तारा समेत अन्य कैदी लंबे समय से कारावास में हैं। उन्होंने सरकारों से मानवीय आधार पर उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। धामी ने कहा कि 1984 के घाव कभी नहीं भर सकते, लेकिन बंदी सिंहों की रिहाई से पीड़ित परिवारों को कुछ राहत अवश्य मिल सकती है।