पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ओर से जत्थेदार जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल देने की सिफारिश को लेकर सियासत गरमा गई है। खालसा कॉलेज अमृतसर से सेवानिवृत्त प्रोफेसर और जत्थेदार जगतार सिंह हवारा से संबंधित कमेटी के मुख्य प्रवक्ता प्रो. बलजिंदर सिंह ने सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। प्रो. बलजिंदर सिंह ने कहा कि यदि सरकार की ओर से राज्यपाल को भेजी गई सिफारिश पर वास्तव में अमल होता है तो सिख जगत इसका स्वागत करेगा। हालांकि, उन्होंने सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री की इस पहल के पीछे केवल मानवीय संवेदना है या 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सिख वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश भी है। उन्होंने कहा कि हवारा की बुजुर्ग मां काफी समय से बीमार हैं और बिस्तर पर हैं। ऐसे में मां को अपने बेटे से मिलने का अवसर मिलना मानवीय और पारिवारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। प्रो. बलजिंदर सिंह ने दावा किया कि इससे पहले पंजाब सरकार ने 2026 में दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर हवारा को पैरोल न देने की बात कही थी। अब पैरोल की सिफारिश किए जाने से सरकार की नीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल अक्सर बंदी सिंहों की रिहाई या पैरोल को लेकर पत्र जारी करते हैं, लेकिन असली महत्व फैसले को लागू कराने का है। उन्होंने कहा कि यदि हवारा को 10 दिन की पैरोल मिलती है तो सिख जगत सरकार को बधाई देगा, लेकिन केवल राजनीतिक बयानबाजी तक मामला सीमित रहा तो सरकार की नीयत पर सवाल उठते रहेंगे।