श्री दरबार साहिब के पूर्व हेड ग्रंथी एवं श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने सोशल मीडिया पर चल रहे दावों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि वह किसी विशेष जांच दल (SIT) के समक्ष पेश होने नहीं गए थे। उन्होंने कहा कि SIT के सदस्य पूर्व निर्धारित समय लेकर उनके निवास स्थान पर आए थे और उनसे केवल 2 दिसंबर 2024 को श्री अकाल तख्त साहिब में हुई कार्रवाई के संबंध में जानकारी ली गई थी। ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्टों में यह प्रचारित किया जा रहा है कि वह SIT के समक्ष पेश हुए हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि जांच टीम स्वयं उनके घर पहुंची थी। उन्होंने बताया कि बातचीत केवल 2 दिसंबर 2024 को अकाल तख्त साहिब में हुई कार्यवाही तक सीमित रही। उन्होंने कहा कि SIT ने 328 पावन स्वरूपों के मामले या किसी अन्य संवेदनशील विषय पर उनसे कोई सवाल नहीं पूछा। जांच टीम ने केवल उस दिन शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल और अन्य नेताओं से पूछे गए सवालों तथा उनके जवाबों के संबंध में जानकारी हासिल की। ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि 2 दिसंबर की पूरी कार्यवाही सार्वजनिक रूप से हुई थी, जिसे देश-विदेश की संगत ने विभिन्न मीडिया माध्यमों पर लाइव देखा था। उन्होंने धार्मिक पदों की गरिमा बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि धर्म से प्रेरणा लेकर ही राजनीति होनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद सिख धार्मिक और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।