खालसाई शान और आध्यात्मिक परंपरा के प्रतीक होला मोहल्ला के पावन अवसर पर सचखंड श्री दरबार साहिब और एसजीपीसी के प्रबंधकों की ओर से श्री अकाल तख्त साहिब से अलौकिक नगर कीर्तन सजाया गया। सुरमई निशान साहिब और पंच प्यारों की अगुवाई में निकले इस नगर कीर्तन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर खालसाई विरासत को नमन किया। गुरु मर्यादा के अनुसार अरदास के बाद शुरू हुआ नगर कीर्तन शहर के विभिन्न बाजारों और बुरज बाबा फूला से होकर वापस श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचकर संपन्न होगा। इस नगर कीर्तन की विशेषता यह है कि इसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश नहीं किया जाता, बल्कि सुरमई निशान साहिब की अगुवाई में पंथक परंपरा के अनुसार जत्थेबंदियां शामिल होती हैं। इतिहास के अनुसार यह सुरमई निशान साहिब दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा बाबा राम सिंह जी को भेंट किया गया था। महाराजा रणजीत सिंह के समय से चली आ रही यह परंपरा आज भी खालसाई शौर्य और पंथक गौरव की प्रतीक बनी हुई है।